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देश में जल्द लागू हो सकता है यूनिफॉर्म सिविल कोड, सुप्रीम कोर्ट ने कहा यही सही समय है

दिल्ली उच्च न्यायालय ने इशारों इशारों में यूनिफॉर्म सिविल कोड यानी समान नागरिक संहिता लागू करने की बात कह दी है। दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक मीणा जनजाति और उसके हिंदू पति के बीच तलाक के मुकदमे की सुनवाई के दौरान कहा कि अब समान नागरिक संहिता समय की मांग है।

 

दिल्ली उच्च न्यायालय का कहना है कि आधुनिक भारतीय समाज धीरे-धीरे “सजातीय” होता जा रहा है, धर्म, समुदाय और जाति के ‘पारंपरिक बाधाओं’ को खत्म कर रहा है, और इन बदलते प्रतिमानों को देखते हुए एक समान नागरिक संहिता क्रम में है।

 

दरअसल तलाक के चल रहे इस मुकदमे में पति और पत्नी अपने अपने धर्म के मैरिज एक्ट के हिसाब से तलाक चाहते थे। इस पर कोर्ट ने कहा कि आज के युग में जातीय भेदभाव समाप्त हो रहा है, इस वजह से दूसरे धर्म में शादी और तलाक में काफी दिक्कतें आ रही हैं।

 

यूनिफॉर्म सिविल कोड :

 

यूनिफॉर्म सिविल कोड यानी देश के सभी नागरिकों के लिए एक कानून। अभी देश में हिंदू पर्सनल लॉ और मुस्लिम पर्सनल लॉ है। अलग अलग कानून होने की वजह से शादी, तलाक, जायदाद जैसे अन्य विषयों को सुलझाने में बहुत समस्या आती है। यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू हो जाने के बाद सभी नागरिकों के लिए चाहे वो किसी भी धर्म का हो उसके लिए एक कानून ही होगा। देखा जाए तो आज के युवा भी इस कानून की मांग लंबे समय से करते आ रहे हैं।

 

 

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