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EWS आरक्षण को सुप्रीम कोर्ट की हरी झंडी, दो जजों ने कहा – गलत हो रहा है ये…

नई दिल्ली। देश भर में आर्थिक रुप से कमजोर व्यक्ति को EWS कोटे पर आरक्षण (Reservation ) के फैसले को जायज ठहराते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इसे लगभग हरी झंडी दे दी है यानि ये अब जारी रहेगा। मुख्य न्यायाधीश यूयू ललित और न्यायमूर्ति दिनेश माहेश्वरी ने अपना फैसला पढ़ा और ईडब्ल्यूएस आरक्षण को बरकरार रखा।उन्होंने कहा कि यह कोटा संविधान के मूल सिद्धांतों और भावना का उल्लंघन नहीं करता है। मुख्य न्यायाधीश और न्यायमूर्ति माहेश्वरी के अलावा न्यायमूर्ति बेला एम त्रिवेदी ने ईडब्ल्यूएस कोटे के पक्ष में अपनी राय रखी. उनके अलावा जस्टिस जेपी परदीवाला ने भी गरीबों को दिए जाने वाले 10 फीसदी आरक्षण को सही ठहराया।

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न्यायमूर्ति बेला एम त्रिवेदी ने कहा कि मेरा निर्णय न्यायमूर्ति माहेश्वरी की राय के अनुरूप है। उन्होंने कहा कि ईडब्ल्यूएस कोटा वैध और संवैधानिक है। हालांकि, न्यायमूर्ति एस रवींद्र ने इस ईडब्ल्यूएस कोटा को अवैध घोषित किया। 10 प्रतिशत ईडब्ल्यूएस आरक्षण पर, सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया 5 जजों की संवैधानिक बेंच में 4-1.सिर्फ जस्टिस एस. रवींद्र भट्ट ने इस कोटे को गलत बताया. उन्होंने कहा कि यह कानून भेदभाव से भरा है और संविधान की मूल भावना के खिलाफ है। बता दें कि ईडब्ल्यूएस आरक्षण को लेकर संविधान के 103वें संशोधन के जरिए 2019 में संसद ने एक कानून पारित किया था. इस फैसले को कई याचिकाओं के जरिए सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी, जिस पर लंबी सुनवाई के बाद आज कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया।

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