Taj Mahal controversy : जानें आखिरी बार कब खुले थे ताजमहल के 22 कमरे?, किसके किया था इन्हें बंद, देखे उस समय की फोटोज…

WhatsTheNews डेस्क/ ताजमहल का रहस्य उसके तहखानेDue to these reasons, these 22 rooms of the Taj Mahal were closed back में छुपा हुआ है। कई शोधकर्ताओं की मानें तो ताजमहल के नीचे तकरीबन 1000 से भी ज्यादा कमरे हैं।

 

साथ ही कहा जाता है कि ताजमहल से बाहर निकलने के लिए भी एक खुफिया दरवाजा है, जिसे शाहजहां के समय से ही ईंटों से बंद करवा दिया गया था। जिसके बाद से ही यहां पर किसी को आने की परमिशन नहीं दी जाती है।

 

ताजमहल के बारे में कहा जाता है कि वो जितना जमीन के ऊपर बना हुआ है उतना ही जमीन के नीचे गहराई में भी है। ताजमहल का खुफिया दरवाजा उसके निर्माण के पश्चात् ही बंद किया गया था। गौरतलब है कि इतिहास में जब भी कोई किला बनाया जाता था तो उसमें एक खुफिया रास्ता भी होता था जहां से बाहर निकला जा सकता था।

 

ताजमहल में एक ऐसा दरवाजा है जिसे कई सालों से खोला नहीं जाता है। इस दरवाजे को खोलने के लिए सरकार ने भी निर्देश नहीं दिए है। यहां पर घूमने आए सैलानियों को इस दरवाजे के पास जाने की भी इजाजत नहीं दी जाती है।

 

कई शोधकर्ताओं का मानना है कि इस दरवाजे के अंदर कमरे में मुमताज की कब्र को रखा गया है। इसलिए ही इस कमरे को हमेशा से बंद रखा जाता है और यहां पर किसी के भी प्रवेश को प्रतिबंधित किया हुआ है।

 

लेकिन कुछ पुरातत्वविदों ने दावा किया कि इस जगह पर पहले एक तेजो महालय नाम का शिव मंदिर था।

 

कुछ अन्य लोगों का कहना है कि इस कमरे में बड़ी मात्रा में खजाना छिपा हुआ है, जिसकी पुष्टि मेटल डिटेक्टर में भी हुई है।

 

इसलिए, ताजमहल के तहखाने को बंद करने के कई कारण सामने आ रहे हैं ।

 

ताज महल के तहखाने में ऐसा क्या है जहां किसी को भी जाने की इजाज़त नहीं है?

. दुनिया के सात आश्चर्य में एक ताज महल. विश्व के शानदार महलों में एक जिसके पीछे कई कहानियां भी है. विवाद की शुरुआत हुई 60 से 70 के दसक में जब पी. ऍन. ओक ने अपने पुस्तक ताजमहल: सत्य कथा में, यह दावा किया है, कि ताजमहल, मूलतः एक शिव मन्दिर या एक राजपूताना महल था, जिसे शाहजहाँ ने कब्ज़ा करके एक मकबरे में बदल दिया।

 

उनका कहना था की कैसे सभी (अधिकांश) हिन्दू मूल की कश्मीर से कन्याकुमारी पर्यन्त इमारतों को किसी ना किसी मुस्लिम शासक या उसके दरबारियों के साथ, फेर-बदल करके या बिना फेरबदल के, जोड़ दिया गया है।उन्होंने हुमायुं का मकबरा, अकबर का मकबरा एवं एतमादुद्दौला के मकबरे, तथा अधिकांश भारतीय हिन्दू ऐतिहासिक इमारतों, यहाँ तक कि काबा, स्टोनहेन्ज व वैटिकन शहर तक हिन्दू मूल के बताये हैं। ओक का भारत में मुस्लिम स्थापत्य को नकारना, मराठी जग-प्रसिद्ध संस्कृति का अत्यन्त मुस्लिम विरोधी अंगों में से एक बताया गया है।

 

ओक ने दावा किया है, कि ताज से हिन्दू अलंकरण एवं चिह्न हटा दिये गये हैं और जिन कक्षों में उन वस्तुओं एवं मूल मन्दिर के शिव लिंग को छुपाया गया है, उन्हें सील कर दिया गया है। साथ ही यह भी कि मुमताज महल को उसकी कब्र में दफनाया ही नहीं गया था।

 

इन दावों के समर्थन में, ओक ने ताज की यमुना नदी की ओर के दरवाजों की काष्ठ की कार्बन डेटिंग के परिणाम दिये हैं, यूरोपियाई यात्रियों के विवरणों में ताज के हिन्दू स्थापत्य/वास्तु लक्षण भी उद्धृत हैं। उन्होंने यहाँ तक कहा है, कि ताज के निर्माण के आँखों देखे निर्माण विवरण, वित्तीय आँकड़े, एवं शाहजहाँ के निर्माण आदेश, आदि सभी केवल एक जाल मात्र हैं, जिनका उद्देश्य इसका हिन्दू उद्गम मिटाना मात्र है।

ताजमहल के हिन्दू शिवमन्दिर होने के पक्ष में पी०एन० ओक अपनी पुस्तक “ताजमहल ए हिन्दू टेम्पल” में सौ से भी अधिक प्रमाण एवं तर्क देकर दावा करते हैं कि ताजमहल वास्तव में शिव मन्दिर था जिसका असली नाम ‘तेजोमहालय’ हुआ करता था। ओक साहब यह भी मानते हैं कि इस मन्दिर को जयपुर के राजा मानसिंह (प्रथम) ने बनवाया था जिसे तोड़ कर ताजमहल बनवाया गया। इस सम्बन्ध में उनके निम्न तर्क विचारणीय हैं:

 

किसी भी मुस्लिम इमारत के नाम के साथ कभी महल शब्‍द प्रयोग नहीं हुआ है।

 

‘ताज’ और ‘महल’ दोनों ही संस्कृत मूल के शब्द हैं।

 

संगमरमर की सीढ़ियाँ चढ़ने के पहले जूते उतारने की परम्परा चली आ रही है जैसी मन्दिरों में प्रवेश पर होती है जब कि सामान्यतः किसी मक़बरे में जाने के लिये जूता उतारना अनिवार्य नहीं होता।

संगमरमर की जाली में 108 कलश चित्रित हैं तथा उसके ऊपर 108 कलश आरूढ़ हैं, हिंदू मन्दिर परम्परा में (भी) 108 की संख्या को पवित्र माना जाता है।

 

ताजमहल शिव मन्दिर को इंगित करने वाले शब्द ‘तेजोमहालय’ शब्द का अपभ्रंश है। तेजोमहालय मन्दिर में अग्रेश्वर महादेव प्रतिष्ठित थे।

 

ताज के दक्षिण में एक पुरानी पशुशाला है। वहाँ तेजोमहालय के पालतू गायों को बाँधा जाता था। मुस्लिम कब्र में गौशाला होना एक असंगत बात है।

ताज के पश्चिमी छोर में लाल पत्थरों के अनेक उपभवन हैं जो कब्र की तामीर के सन्दर्भ में अनावश्यक हैं।

 

संपूर्ण ताज परिसर में 400 से 500 कमरे तथा दीवारें हैं। कब्र जैसे स्थान में इतने सारे रिहाइशी कमरों का होना समझ से बाहर की बात है।

 

निश्चित ही ताजमहल पर पीएन ओक का लेख कोई अपवाद नहीं था. ऐसे तमाम लेख/किताबें लगातार प्रकाशित होने लगे.

 

उनका कहना था की हरेक हिन्दू भवन में एक बेसमेन्ट होता है जो की ताज महल में है. नीचे के कमरों में हिन्दू प्रतिलिपियाँ चिन्हित हैं जिसे गौर से देखा जाये तो ये साफ़ प्रतीत होता है की उसे किसी चीज़ से रगडा या मिटाया गया है. यमुना किनारे की ओर से सिर्फ 22 कमरों को एक बार खोला गया था जिसे फिर से लॉक कर दिया गया क्योंकि उसके बाद फिर विवाद उठने लगे किस बाकी कमरों में हिन्दू स्कल्पचर, देवी देवताओं की मूर्तियां हो सकती हैं. उसके बाद कई हिन्दू संगठनों द्वारा तहखाने या उसके कमरे को खोलने की मांग की जाने लगी.सरकार किसी भी तरह का विवाद नहीं चाहती थी इसलिए ताजमहल के नीचे के कमरों को हमेशा के लिए सील कर दिया गया.

 

यह खबरें गूगल पर मिली खबरों के मुताबिक बनाया गया है। इनकी पुष्टि whatsthenews.in नहीं करता है

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