आखिर कौन है ये Graduate चाय वाली जो पढ़ लिख कर बेच रही चाय?

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चाय बेचने वाली बात के बाद चाय सिर्फ चाय नहीं रही बल्कि ये एक चर्चा का विषय हो गया । जो लोग चाय के व्यापार को एक छोटा बिजनेस माना करते थे वही आज चाय के बिजनेस को बड़े पैमाने का व्यापार मान रहे हैं। लोग पढ़ाई तो कर रहे हैं लेकिन देश में रोजगार के अवसर कम होता देख अब इस बिजनेस की तरफ रुख कर रहे हैं।

 

जिसके बाद एमबीए चाय वाला जैसे नाम वाले कई लोगों ने इस व्यापार में काफी अवसर देखा और भिड़ गए चाय बनाने।

 

 

 

पटना की लड़की ने खोला चाय का ठेला

 

ऐसा ही एक मामला बिहार की राजधानी पटना के सबसे वीआइपी इलाके बेली रोड पर पटना वीमेंस कॉलेज के ठीक सामने का है जहां प्रियंका गुप्‍ता नाम की लड़की ने हाल ही में चाय का दुकान खोला है. प्रियंका को यह फैसला लिए अभी ज्यादा समय नहीं हुआ है.

 

 

वह 11 अप्रैल से ही चाय बेचने का काम कर रही हैं. बड़ी बात ये है कि अर्थशास्त्र में ग्रेजुएट होने के बावजूद भी प्रियंका को चाय का ठेला लगाने में कोई झिझक या शर्मिंदगी महसूस नहीं होती. वह कहती हैं, “चायवाला हो सकता है तो चायवाली क्यों नहीं हो सकती.”

 

इकोनॉमिक्स में ग्रेजुएट हैं प्रियंका

 

प्रियंका मूल रूप से पूर्णिया के बनमनखी की रहने वाली हैं. वह 2019 में वाराणसी के महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से इकोनॉमिक्स में ग्रेजुएट हैं. वो पिछले कई सालों से प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयारी कर रहीं हैं. परीक्षा में लगातार असफलता मिलने के बाद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी. उन्‍होंने अपने गांव वापस जाने की बजाय पटना में चाय का ठेला लगा कर आत्मनिर्भर भारत का रास्‍ता चुना है.

 

 

वहीं अब प्रियंका का हौसला देख कर सभी लड़कियां इसी तरह चाय की दुकान खोलने की सोच रही हैं।

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प्रफुल्ल बिलोर का वीडियो देख आया आइडिया 

 

ग्रेजुएट चाय वाली’ प्रियंका बताती हैं चाय बेचने का आइडिया ‘एमबीए चाय वाला’ प्रफुल्ल बिलोर का वीडियो देखने के बाद आया. वे लगातार प्रफुल्ल बिलोर के विडियोज देखा करती थीं जिसके बाद इनके अंदर आत्मविश्वास जागा और उन्होंने ये रास्ता चुना।

 

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किसी बैंक ने नहीं की मदद

 

प्रियंका बताती हैं कि, चाय की दुकान खोलने के लिए उनके पास पैसे नहीं थे. उन्‍होंने कई बैंकों से संपर्क किया, ताकि प्रधानमंत्री मुद्रा लोन स्कीम के तहत पैसे मिल जाए. उनका दावा है क‍ि किसी बैंक ने कोई मदद नहीं की. इसके बाद दोस्तों से 30 हजार रुपये की मदद लेकर 11 अप्रैल को पटना वीमेंस कालेज के पास चाय की दुकान खोल दी.

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